एग्जाम्स इतने बुरे गये थे कि मैं किसी एक सब्जेक्ट तक मे स्योर नही था की क्लियर हो जाएगा... कभी-कभी रात को सपने मे मैं देखता की मेरी 6 मे 6 बैक लग चुकी है.... फाइनली एग्जाम्स ख़त्म हुआ और लास्ट पेपर जिस दिन था उस दिन मैं सुबह से ही खुश था...क्यूंकी आज के बाद मेरे गर्दन पर इतने दिनो से लटका हुआ एग्जाम्स का घंटा उतरने वाला था और मैं रिज़ल्ट आने तक तो ऐश कर ही सकता था.....
आख़िरी पेपर देने के बाद मैं ऐसे खुश था जैसे कि मैं पूरा यूनिवर्स अपने कब्ज़े मे कर लिया हो... मानो के इस world के साथ - साथ पूरा parallel world मेरे कब्जे मे आ गया हो. ना ही दोपहर मे नींद लगी और ना ही भूख... फिर सोचा की दीपिका मैम के साथ मन ही मन मे कुची -कुची कर लूँ... लेकिन वो करने का भी मन नही किया और मैने पैंट वापस से ऊपर खिसका लिया 😜 साला हाथ दर्द देने लगा था 🤣
उस दिन मुझे अहसास हुआ कि वाकई मे मेरी एफीशियेन्सी सॉलिड है... उस दिन की दोपहर बड़ी मुश्किल से गुज़री ,शाम होते तक हमने कही घूमने-घामने का प्लान बनाया...और ये फिक्स हुआ कि शहर के सबसे बड़े माल मे जाएँगे...लेकिन तभी अरुण बोला...
"बार चलते है,..."
बार का नाम सुनकर मैं और bhu एक दूसरे का मूह ताकने लगे, क्यूंकी हमने अभी तक सोचा भी नही था कि हमे बार भी जाना चाहिए, बार आज तक मैने सिर्फ़ फ़िल्मो मे ही देखे थे या फिर किसी दूसरे के मूह से सुना रख था. जिससे मुझे इतना तो मालूम चल चुका था कि अंदर दारू बहुत महँगी मिलती है.... मैने अपने पर्स मे नज़र डाली , पैसा भरपूर था और वैसे भी जब तक जेब मे बीस हज़ार का मोबाइल हो तो घबराने की क्या ज़रूरत, बेच -बाच के पैसे तो चुका ही सकता हूँ... मैने अपनी गर्दन हां मे हिलाई...फिर क्या था, कही से बाइक जुगाड़ की और रात को 9 बजते ही बार के लिए निकल गये......
"यार अरुण, ये बार वाले साले पैसा बहुत लेते है दारू-वारू के...."
"अब क्या करेगा... देना तो पड़ेगा ही..."
"गाड़ी साइड मे रोक... एक धाँसू आइडिया आएला है भेजे मे...."
मेरे कहने पर जब अरुण ने बाइक सड़क के किनारे रोक दी तब मैं बोला
"अपन तीनो बाहर से ही दारू पीकर चलते है, मस्त नशे मे टन होकर जाएँगे...."
"सोच ले, कही वेलकम पार्टी की तरह कुछ उल्टा सीधा हुआ तो..."
"कुछ नही होगा,यदि कुछ हुआ तो मैं सब संभाल लूँगा..."bhu अपना बीते बराबर सीना चौड़ा करते हुए बोला और जोश जोश मे तुरंत अपने जेब से 1000 रुपये निकाल कर मुझे पकड़ाया और कहा की बाकी का पैसा मै मिलाकर black dog का खम्बा ले आऊं....
"अबे किसी ढाबे मे चलकर पीते है, वेलकम पार्टी की तरह नहीं की.. बोतल मे आधे -आध पानी... साला हैंगओवर मार देता है...शुक्र मनाओ कि वो इमली के पेड़ के नीचे वाली वो भूतही लड़की दिखी नही ,वरना पकड़ के पेलती वो हम तीनो को बारी -बारी ...."
"अब चले...."
"चलो, दौड़ो,भागो...."
फिर एक ढाबे पर रुक कर हमने खाना खाया और black dog की तीन बोतले खाली कर दी.. हुआ कुछ यूँ की हॉस्टल के भी कुछ और लड़के एग्जाम्स ख़त्म होने की ख़ुशी मे वहा आ पहुचे थे तो सबने फिर मिलकर ही माहौल बनाया... इसके बाद हम तीनो अपना -अपना बिल भरकर बाइक की तरफ बढ़े....
"अरुण...बाइक मैं चलाउन्गा..."मैं बोला. इस वक़्त मैं उन दोनो से थोड़ा पीछे चल रहा था...
"बेटा आँख खुल नही रही, गाड़ी क्या चलाएगा..."
"तेरी तो..."मैने अरुण के हाथ से बाइक की चाभी छीनी और बाइक पर सामने बैठकर उन दोनो को पीछे बैठने के लिए कहा,
"यार अरमान, बाइक गर्ल्स हॉस्टल की तरफ ले ,उस ताडकासुर वार्डन की मारनी है...उस दिन गर्ल्स हॉस्टल मे उसी ने मुझे एक झापड़ मारा था...."मेरे बैठने के बाद bhu बोला
"अबे चुप bhu, अभी बार जाना है..."अरुण भूपेश के सर पर एक हाथ पेलते हुए बोला...
मैने बाइक स्टार्ट की और सडक पर दौड़ा दिया... क्या मस्त हवा चल रही थी... जब हम सिटी से कट कर अपने कॉलेज वाले जुंगली रास्ते पर आए तो ,उधर सामने से जो भी आता या सामने जो भी दिखता उसे भरपूर गाली देते और बोलते कि"दम है तो उखाड़ के दिखा..."
एक ने पुछा भी क्या उखाडू तो मैने कहा" जिससे पेशाब करता है, वो उखाड़ दे "
जैसे जैसे कॉलेज की तरफ मैं बाइक दौड़ा रहा था, स्पीड बढ़ती जा रही थी और मेरी आँख अब बंद होने लगी....मुझे ऐसे लगने लगा जैसे कि मैं एक सूपर हीरो हूँ और दुनिया को बचाने के लिए जल्दी से जल्दी कॉलेज पहुचना है... मैने अपनी एक आँख बंद करके एक्सेलरेटर को और पेल दिया...और बाइक सीधे गर्ल्स हॉस्टल के बाहर रोकी.....
"अबे ताडकासुर ,निकल बाहर....."bhu चिल्लाया
लेकिन जब गर्ल्स हॉस्टल के अंदर से कोई हरकत नहीं हुई तो भूपेश को कुछ ज़्यादा ही गुस्सा आ गया और उसने वही से दो चार पत्थर उठाकर हॉस्टल की तरफ अंदर फेका.. गर्ल्स हॉस्टल का गेट था तो बहुत बड़ा पर लोहे की रोड्स से बना हुआ था और उनके बीच मे अच्छा खासा इतना गप तो था ही की हॉस्टल के बाहर जल रहे बल्ब की रोशनी मे अंदर देखा जा सके... Bhu ने उसी बल्ब की रोशनी की हेल्प लेते हुए सीधे वार्डन के रूम को निशाना बनाया... उसने उस दिन 2-3 बार पत्थर वार्डन को गाली देते हुए अंदर फेका था और हर बार काँच टूटने की आवाज़ हमारे कानो मे पड़ी थी, जिसके बाद कुत्तो के भोकने की आवाज़ हुई और वहाँ गेट के बाई ओर बने एक छोटे से कमरे से हॉस्टल का चौकीदार निकल कर हमारी तरफ बढ़ा.. यानी गेट की तरफ बढ़ा...
"भाग जा, वरना तुझे भी थुर दूंगा हुमच के एक पत्थर...."कहते हुए हुए bhu ने वही सडक पर पडे पत्थरो को उठाकर चौकीदार पर भी फेकना शुरू कर दिया.
लेकिन जब वो चौकीदार अपने डंडे को बैट बनाकर bhu द्वारा फेके गये पत्थरो से क्रिकेट खेलने लगा तो हमे वहाँ से भागना पड़ा...गाड़ी अब भी मैं ही चला रहा था...मैं वहाँ से भागने के पहले ज़ोर ज़ोर से चिल्लाया...
"ओये मोटी भैंस ,मेरा नाम गौतम है, मैकेनिकल सेकंड ईयर.. एक बाप की औलाद है तो उखाड़ लेना, जो उखाड़ना होगा.. गौतम किसी से नहीं डरता... ...."
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"अबे अब तो वो गौतम गया, साला ..."अरुण खिस निपोरते हुए मुझसे बोला "सही किया गौतम को फसा कर..."
"चल, बोल पापा.....और ये बाइक को क्या हुआ...??...."
"पेट्रोल ख़त्म हो गया होगा..."
"क्या...ऐसे मे तो ठुकाई हो जाएगी... यदि "मैं बाइक को हिलाते हुए पेट्रोल चेक करने लगा....लेकिन बाइक नही हिली, अरुण और bhu जो सवार थे
"सालो, उतर के धक्का मरोगे या ये कोई पुष्पक विमान है, जो मै मन की गति से चला लूंगा......"
जब वो दोनो बाइक से उतर गये तो मैने बाइक पूरी ताक़त से हिलाई ,इतनी ताक़त से हिलाई कि मैं खुद हिल गया और बाइक के साथ नीचे ज़मीन पर आ गिरा......
"इसकी तो, बाइक की माँ की...कौन लाया ये खचरी बाइक..."
"ज़्यादा लगी तो नही..."bhu मुझे उठाते हुए पूछा
"मर्द हूँ, ऐसी छोटे मोटे ज़ख़्मो का असर नही होता...."झूठ बोलते हुए मैने कहा,...
इतनी देर मे कोई गर्ल्स हॉस्टल के गेट से बाहर निकलकर हम पर टॉर्च मारने लगा था, यदि इसने टॉर्च की रोशनी मे हमारी शक्ल देख ली तो फिर अबकी डायरेक्टर पक्का T. C. हाथ मे थमा देगा ...
"ये टॉर्च...कौन मार रहा है, हम तीनो पर..."हम तीनो उस टॉर्च दिखाने वाले को गालियाँ देने लगे
"अबे भाग... ये तो चौकीदार है गर्ल्स हॉस्टल का...." Bhu बाइक और हमें छोड़कर पैदल ही वहा से सडक को छोड़ एक ओर भागा
"गौतम, निकाल बंदूक और मार गोली इसके पिछवाड़े मे सीधे... साला टॉर्च मार रहा है.. बन्दूक निकाल ..."अरुण अपना चेहरा सामने घुमा कर बोला, जिससे उसकी पीठ गार्ड के सामने thi....
"बंदूक नही मिसाइल मारते है, साले के उपर सीधे ...यही चिथड़े-चिथड़े हो जाएँगे इसके शरीर के...."मैने भी गर्रा कर कहा....
गर्ल्स हॉस्टल का चौकीदार जो टॉर्च मारते हुए हमारी तरफ बढ़ने लगा था ,वो हमारी बाते सुन जहा था, वही रुक गया और एक बार फिर वही से हम पर लाइट मारी....
"गौतम...."मैने जानबूझकर अरुण को गौतम कहकर पुकारा"गौतम, निकाल ना बे बन्दूक... इसके पुरे खानदान को गोली मारेंगे, हरामी ज्यादा हीरो बन रहा है ..."
"रुक साले को... अभी दिखाता हूँ, सीधे बम फेकता हूँ उसपर ."
वो चौकीदार अब भी वहाँ खड़ा हमे देख रहा था, उसके आगे आने की हिम्मत नही हो रही थी, तभी अरुण नीचे झुककर एक पत्थर उठाया और उसकी तरफ फेंका....
"भाग बे कुत्ते... बम है..."
"आआआआ....."चिल्लाते हुआ चौकीदार वहाँ से भाग गया....
Barsha🖤👑
26-Nov-2021 06:01 PM
एक और मोड़..
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Fiza Tanvi
08-Oct-2021 05:11 PM
Good
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